Sunday, October 4, 2026

संसार एक तरफ… और मेरी माँ एक तरफ

संसार एक तरफ, मेरी माँ एक तरफ… “संसार एक तरफ और मेरी माँ एक तरफ…” यह बात मैंने माँ को खोने के बाद महसूस की। माँ जब साथ थीं, तब शायद उनकी महानता को उस गहराई से समझ ही नहीं पाया/पाई। लगता था कि माँ तो हमेशा रहेंगी—उनकी आवाज़, उनका स्नेह, उनकी डाँट, उनका इंतज़ार… सब कुछ हमेशा यूँ ही रहेगा। लेकिन माँ के जाने के बाद समझ आया कि माँ केवल एक रिश्ता नहीं होतीं, माँ पूरी दुनिया होती हैं। माँ के रहते घर सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि सुकून का ठिकाना होता है। उनकी आवाज़ में अपनापन होता है, उनकी डाँट में चिंता होती है और उनकी खामोशी में भी हमारे लिए हजारों दुआएँ छिपी होती हैं। आज जीवन में सब कुछ है—लोग हैं, रिश्ते हैं, दुनिया है, अपनी-अपनी व्यस्तताएँ हैं… लेकिन माँ नहीं हैं। और अब समझ आता है कि दुनिया की सारी खुशियाँ मिलकर भी माँ की एक मुस्कान की बराबरी नहीं कर सकतीं। माँ वो थीं जो मेरी तकलीफ़ बिना बताए समझ जाती थीं। मेरी खुशी में सबसे ज्यादा खुश होती थीं। मेरी गलतियों पर डाँटती थीं, लेकिन दुनिया के सामने हमेशा मेरा पक्ष लेती थीं। मैं कितना भी बड़ा क्यों न हो जाऊँ, उनके लिए हमेशा उनका बच्चा ही रहा/रही। माँ के जाने के बाद सबसे ज्यादा उनकी कमी उन छोटे-छोटे पलों में महसूस होती है— जब कोई पूछने वाला नहीं होता कि “खाना खाया?” जब कोई बिना कहे समझने वाला नहीं होता कि मन में क्या चल रहा है। जब खुशी मिलती है और सबसे पहले उन्हें बताने का मन करता है… फिर अचानक याद आता है कि अब फोन के उस पार माँ की आवाज़ नहीं आएगी। माँ चली जाती हैं, लेकिन उनका प्यार कभी नहीं जाता। उनकी बातें, उनकी सीख, उनका स्पर्श, उनकी यादें और उनकी दुआएँ हमेशा हमारे साथ रहती हैं। आज माँ की तस्वीर को देखता/देखती हूँ तो आँखें नम हो जाती हैं। मन बस यही कहता है— “माँ, जब आप थीं तब शायद मैं आपकी कीमत पूरी तरह समझ नहीं पाया/पाई… लेकिन आपके जाने के बाद समझ आया कि मेरी जिंदगी में आपकी जगह कोई नहीं ले सकता।” सच ही कहा गया है— दुनिया में रिश्ते बहुत मिलते हैं, लेकिन माँ जैसा रिश्ता दोबारा नहीं मिलता। आज मेरे लिए सचमुच— संसार एक तरफ… और मेरी माँ एक तरफ। माँ, आप जहाँ भी हैं, मेरी हर खुशी में आपका हिस्सा है और मेरी हर दुआ में आपका नाम। आप मेरे साथ नहीं हैं, लेकिन मेरी हर साँस में आपकी याद हमेशा जीवित रहेगी। माँ को खोना जीवन का सबसे बड़ा खालीपन है, और माँ की याद उस खालीपन की सबसे खूबसूरत पीड़ा।

Wednesday, September 17, 2025

तर्पण 2025

जब हम तर्पण करते हैं, तो हमें यह अनुभूति होती है कि हमने अपने पितरों का स्मरण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। यह मन को हल्का करता है और भीतर एक शांति का संचार करता है। तर्पण से व्यक्ति को यह संतोष मिलता है कि उसने अपने पूर्वजों के प्रति अपने कर्तव्य का पालन किया है। यही संतोष आगे चलकर मानसिक शांति और आत्मिक बल का आधार बनता है।

Wednesday, October 4, 2023

दैनिक जागरण में प्रकाशित श्रद्धांजलि - 2023

माँ की ममता को सादर नमन 2023

इस जहाँ मे अगर कही स्वर्ग है तो, वो माँ का चरण व आंचल है, माँ के चरणो मे ही संसार के सभी सुख निहित है, माँ ही वो है जिसने आप को जन्म दिया, पालन पोषण किया, अपने पैरो पर खडा किया, माँ के प्यार से बडा इस जहाँ मे किसी का प्यार नही, माँ ही दुनिया है, माँ ही सबकुछ है।

Tuesday, October 4, 2022

माँ की संस्मरण

माँ की ममता को आज फिर एक नमन

माँ की ममता को आज फिर एक नमन, 13 वीं पुण्यतिथि पर आज शत शत नमन माँ को आश्विन मास नवरात्र में महानवमीं तिथि को पुण्य स्मृति 🙏