जब हम तर्पण करते हैं, तो हमें यह अनुभूति होती है कि हमने अपने पितरों का स्मरण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। यह मन को हल्का करता है और भीतर एक शांति का संचार करता है। तर्पण से व्यक्ति को यह संतोष मिलता है कि उसने अपने पूर्वजों के प्रति अपने कर्तव्य का पालन किया है। यही संतोष आगे चलकर मानसिक शांति और आत्मिक बल का आधार बनता है।